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सामाजिक न्याय के महान नेता बाबू जगजीवन राम को उनकी जयंती पर स्मरण
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे और अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री के रूप में देश की सेवा की। भारत में हरित क्रांति के दौर में उनका नेतृत्व बेहद महत्वपूर्ण रहा। उस समय देश खाद्यान्न की कमी से जूझ रहा था, लेकिन किसानों के प्रति उनकी नीतियों और समर्पण ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
देश के इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों में भी उनका नेतृत्व स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, जब बांग्लादेश का निर्माण हुआ, वे रक्षा मंत्री थे। उस कठिन समय में उनके निर्णय और नेतृत्व ने भारत की सुरक्षा और प्रतिष्ठा को मजबूत किया।
इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद उनके राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव भी आए। ऐसे अवसर भी आए जब वे देश का प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन वह मौका नहीं मिला। फिर भी उन्होंने कभी निराशा को अपने सार्वजनिक जीवन पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने हमेशा समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और सामाजिक न्याय के मजबूत समर्थक बने रहे।
आज भी उनका जीवन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, खासकर उन लोगों के लिए जो समाज के वंचित वर्गों से आते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि नेतृत्व का आधार विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और सही के लिए खड़े होने का साहस होता है।
आज उनकी जयंती पर हमें केवल उनके योगदान को याद नहीं करना चाहिए, बल्कि उन मूल्यों को भी आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया—समानता, सम्मान और सभी के लिए अवसर।
बाबू जगजीवन राम की विरासत केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है जो आने वाली पीढ़ियों को एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी भारत बनाने के लिए मार्ग दिखाती रहेगी।
— के. पी. तेननेटी
सांसद (लोकसभा)
पैनल स्पीकर

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar